क्रिसमस क्या है
क्रिसमस की सच्चाई शान्ति से पुरा पढ़ें।
माना की आप व्यस्त रहते हैं लेकिन थोड़ा समय निकल कर अवश्य पढ़े हो सकता है कि आप क्रिसमस सच नहीं जानते हों।
मैं जनता हूँ कि बहुत से पास्टर और मसीही लोग इस सन्देश के खिलाफ होंगे मगर जो सच है वो आप सब को जानना चाहिए। मुझे आशा है कि बहुत से मसीही इस सच को स्वीकार भी करेंगे। आप क्रिसमस की सच्चाई को ठुकरा सकते हैं लेकिन सच्चाई और इतिहास नहीं बदल सकते।
25 दिसम्बर को यीशु का जन्मदिन मान कर क्रिसमस बहुत धूम-धाम से मनाया जाता है। नये- नये कपड़े बनते हैं। कई तरह के पकवान बनते हैं। घरों में अच्छा-अच्छा खाना बनता है। घर सजाये जाते हैं। क्रिसमस ट्री को सजाया जाता है। छत पर बड़ा सा स्टार लगाया जाता है और क्रिसमस केक जिसके बिना क्रिसमस अधूरा सा लगता है। क्रिसमस ईसाईयों का प्रमुख त्यौहार है। क्रिसमस ईसाइयों की ख़ुशी का सबसे बड़ा कारण है।
चलिए अब आगे बढ़ते हैं-
Q-क्रिसमस की शुरुआत कब, कैसे, और किसने की?
क्रिसमस रोम के सम्राट कोंस्टेन्टाइन ने 336 A.D में क्रिसमस नाम का त्यौहार बनाया और तारीख 25 दिसम्बर रखी। कोंस्टेन्टाइन एक गैर- मसीही सम्राट था जो नाम मात्र के लिए मसीही बन कर कलीसिया में घुस गया और अपने नए कानून बनाये। पहले 25 दिसम्बर को सूर्य देवता का जन्मदिन मनाया जाता था। कोंस्टेन्टाइन ने मसीही लोगों के लिए 25 दिसम्बर पर क्रिसमस इसलिए बनाया ताकि गैर- मसीही और मसीही लोगो में प्रेम बढ़े और एक दूसरे से भाईचारे और मेल मिलाप से रहें। क्योंकि साटरनालिया त्यौहार 17 से 24 दिसम्बर तक मनाया जाता था। 25 को सूर्य देवता के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता था। इसलिए कोंस्टेन्टाइन ने मसीही लोगों के लिए 25 दिसम्बर तारीख चुनी। 25 दिसम्बर को क्रिसमस नाम का त्यौहार बनाया। यह वह समय था जब मसीही लोगो को सताया जाता था और बाइबल पढ़ने की मनाही थी या तो रोम का कानून मानो या मौत स्वीकार करो।
336 A.D यह वह समय था जब क्रिसमस यीशु के जन्म के रूप में नहीं था।
Q- तो किसने क्रिसमस को यीशु के जन्म दिन में बदला?
आप को जान कर हैरानी होगी की क्रिसमस 25 दिसम्बर को बनने के कुछ साल बाद रोमन कैथोलिक प्रधान पोप जूलियस प्रथम ने 25 दिसम्बर क्रिसमस को यीशु के जन्म दिन में बदला। यह वह समय था जब रोम में 25 दिसम्बर को सूर्य देवता का जन्म दिन मनाया जाता था जिसे रोमन कैथोलिक ने यीशु का जन्म दिन घोषित कर दिया। आज जो 25 दिसम्बर छुट्टी और त्योहार के रूप में मनाया जाता है ये रोमन कैथोलिक का बनाया हुआ है जिसे यीशु के जन्म दिन के रूप में मनाया जाता है। क्रिसमस मनुष्य का बनाया हुआ है ये मनुष्य की आज्ञा है।
क्रिसमस मूर्ती पूजकों के त्यौहार से लिया गया है।
क्रिसमस एक गैर-मसीही त्यौहारों से है जिसमें पेड़ सजाना, मोमबत्तियां जलाना, सूर्य की प्रतिमा सजाना, घर सजाना, जशन मनाना, शराब पीना, नाच-गाना करना, जैसे साटरनालिया त्यौहार में होता था वैसे ही क्रिसमस पर भी होता है। रोमनवासी (गैर- मसीही) लोगों का मनाना था 25 दिसम्बर को सूर्य देवता का पुनर्जन्म है और सूर्य देवता हमारे लिये खुशियाँ लेकर आते हैं। आज के समय में मसीही समाज में पास्टर, बिशप, प्रचारक, पादरियों और मसीहियों का मानना है कि क्रिसमस हमारे लिये खुशियां लेकर आता है। ये ठीक वैसा है जैसे मूर्ति पूजक सोचते थे।
एक बार इन चित्रों(Icons) को ध्यान से देखें-
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यह क्रिसमस मनाने की तस्वीर है।
जशन,
नाच- गाना,
नये कपड़े,
सजावट,
मटन,
चिकन,
बिरयानी,
पकवान,
DJ या साउन्ड सिस्टम,
केक,
सेल्फी,
मस्ती,
पार्टी,
डांस,
डारू,
सिगरेट,
गिफ्ट देना।
g.f और b.f के साथ समय बिताना।
ये ठीक वैसा है जैसे साटरनालिया त्योहार में गैर- मसीही ऐसा मनाते थे और दारू पी कर स्त्री- पुरूष, लड़के- लड़कियां अय्याशी और भोग-विलास करते थे, और एक साथ खाते- पीते थे, खेलते- कूदते थे।
क्रिसमस पवित्र त्योहार नहीं है। क्रिसमस मसीह विरोधी मनुष्य का बनाया हुआ है।
सबसे पहली बार क्रिसमस 354 A.D के बाद मनाया गया।
क्रिसमस उस मनुष्य की आज्ञा है जो अपने आपको परमेशवर कहता है रोमन कैथोलिक पोप। आप क्रिसमस मना कर, सम्मान दे कर, आप यीशु को नहीं पोप को सम्मान दे रहे हैं जिसने व्यवस्था और समयों को और परमेशवर की आज्ञाओं को बदला।
एक अकाट्य सच-
क्रिसमस मना कर आप पोप की आज्ञा मानते हैं और आप रोमन कैथोलिक के आगे घुटने टेके और सिर झुकाए हैं।
•रोमन कैथोलिक कहते हैं-
रोमन कैथोलिक कहते हैं कि प्रोस्टेन्ट लोग रोमन कैथोलिक से अलग होने का दावा करते हैं और कहते हैं कि हम बाइबल की सच्चाई पर चलते हैं।
लेकिन प्रोस्टेन्ट लोग रोमन कैथोलिक के त्योहारों को गले से लगाये रहते हैं।
प्रोस्टेन्ट 1600 A.D में रोमन कैथोलिक से अलग हो गये।
तो आज भी रोमन कैथोलिक के बनाये त्यौहारों को क्यों मानते हैं?
सच यह है कि प्रोस्टेन्ट कालिसियाएँ कभी भी रोमन कैथोलिक से अलग नहीं हुए अगर अलग हुए तो आज भी उनकी आज्ञाओं और त्यौहारों को क्यों मानते हैं?
क्रिसमस मानाने वालों को पोप और मरियम और संतों की मूर्ती के आगे सिर झुकना और मोमबत्ती जलाना चाहिए। अगर नहीं तो उनका बनाया त्यौहार क्रिसमस क्यों मानते हो?
सावधान हो जाए।
क्रिसमस नाम ही बाइबल में नहीं है।
क्रिसमस का बाइबल से कोई संबंध नहीं है।
क्रिसमस यीशु की आज्ञ भी नहीं है।
क्रिसमस यीशु का जन्मदिन भी नहीं है।
क्रिसमस यीशु ने नहीं बनाया।
क्रिसमस परमेशवर ने नहीं बनाया और न ही मानने की आज्ञा दी गयी। फिर भी लोग मानते हैं । परमेशवर को ये सब पसन्द नहीं है।
परमेशवर कहता है-
(प्रकाशितवाक्य 18:4)
फिर मैं ने स्वर्ग से एक शब्द सुना, "हे मेरे लोगों, उस में से निकल आओ कि तुम उनके पापों में भागी न हो, और उनकी विपत्तियों में से कोई तुम पर आ न पड़े।"
बिशप, पास्टर, प्रचारक अच्छी तरह से जानते हैं कि क्रिसमस यीशु जा जन्मदिन नहीं हैं फिर भी अपने आप को बचाने के लिए बनावटी बातें बनाते हैं जो वचन के विरुद्ध होती हैं और झूठी शिक्षा देने लगते हैं और लोग उन बातों पर विशवास भी कर लेते है। क्योंकि वो अपने पास्टर की मानते हैं न की परमेशवर की आज्ञा और वचन।
(मत्ती 15:3,8,9)
3- तुम भी अपनी परम्पराओं के कारण क्यों परमेशवर कि आज्ञा टालते हो?
8- ये लोग होठों से तो मेरा आदर करते हैं, पर उनका मन मुझ से दूर रहता है।
9- और ये व्यर्थ मेरी उपासना करते हैं, क्योंकि मनुष्यों की विधियों को धर्मोपदेशक करके सिखाते हैं।
वचन कहता है कि यदि मनुष्यों की आज्ञा मानोगे तो परमेशवर की उपासना करना व्यर्थ है। बहुत से ऐसे पास्टर और मसीही लोग हैं जो मनुष्यों की आज्ञा मानते हैं कोई भी परमेशवर की सच्ची उपासना नहीं करता। क्रिसमस न तो परमेशवर की आज्ञा है और न ही बाइबिल पर आधारित है। हर मसीही को क्रिसमस नहीं मनाना चाहिए लेकिन बहुत से उस शैतान के वश में हैं जो सच सुनना ही नहीं चाहते हैं और धूम धाम से यीशु का जन्मदिन मनाते हैं जो कि है ही नहीं।
(जो इस सच्चाई को न मानना चाहे और जो क्रिसमस मनाना चाहे तो वो जैसा चाहे वैसा करे। मुझे सच आपके सामने लाना था आगे आपकी मर्जी मगर परमेशवर इसका न्याय जरूर करेगा।)
वचन कहता है-
(मत्ती 22:14)
बुलाये हुए तो बहुत हैं लेकिन चुने हुए थोड़े हैं।
ऐसे लोगों के विषय में वचन क्या कहता है-
(रोमियों 2:8)
पर जो विवादी हैं और सत्य को नहीं मानते, वरन् अधर्म को मानते हैं, उन पर क्रोध और कोप पड़ेगा।
Note- क्रिसमस रोमन केथोलिक प्रधान पोप का बनाया है। इतिहास इस बात का गवाह है। आप क्रिसमस मना कर रोमन कैथोलिक की आज्ञा का पालन करते हैं।
यीशु का जन्म 25 दिसम्बर नहीं है। बाइबल से साबित भी होता है। आगे और भी सब बताया जायेगा। मेरा काम आपको सच बताना था आगे आप जानें आप क्या फैसला लेंगे।

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