शैतान का स्वभाव
*शैतान*
*मसीह जीवन हमारे महाशत्रु शैतान के विरुद्ध एक युद्ध है। मनुष्य के पतन के कारण हम शैतान की सम्पत्ति बन गए।और उसके दास बन गए।*
*बाइबल हमें शैतान का प्रतिरोध करने ,उससे लड़ने और अपने जीवन में उसे स्थान ना देने के लिए कहती है।*
*शैतान का व्यक्तित्व* :-
यूहन्ना 8:44 -
१. शैतान लालची है।
२. शैतान हत्यारा है।
३. शैतान झूठ का पिता है।
४. शैतान सत्य पर स्थिर नहीं रहता है।
५. शैतान में सत्य नहीं है।
६. शैतान झूठ बोलता है।
अय्युब 1:6-12
मत्ती 4: 1-11-
१.शैतान धूर्त है।
२. शैतान धोखेबाज है।
३. शैतान चालाकी है।
*शैतान का चरित्र* :-
1) शैतान चोर है। (मत्ती 13:19)
2) शैतान धूर्त है। ( 2कुरिन्थियों 11:3)
3) वह हत्यारा है। ( यूहन्ना 8:44)
4) वह झूठा है।( यूहन्ना 8:44)
5) वह धोखेबाज है। (प्रकाशितवाक्य 12:9)
*शैतान का अधिकार*: -
1) वह आकाश का अधिकारी है। (2 कुरिन्थियों 11:13-15)
2) वह गरजता हुआ सिंह के समान है। ( 1पतरस 5:8)
3) वह आकाश के अधिकारों का हाकिम है। ( इफिसियों 2:2)
4) वह अन्धकार की शक्ति है। (कुलुस्सियों 1:13)
5) वह बड़ा अजगर है। ( प्रकाशितवाक्य 12:9)
6) वह संसार का राजकुमार है। ( यूहन्ना 14:30)
7) वह नरक या अथाहकुंड का राजा है। ( प्रकाशितवाक्य 9:11)
*शैतान के कार्य*:-
1) वह ऐसों की खोज में रहता है ,जिसको वह फाड़ खाए। ( 1पतरस 5:8)
2) जंगली बीज और दुष्ट सिद्धांतों का बोने वाला है। ( मत्ती 13: 25:30)
3) मनुष्य की बुद्धि को अंधा कर देता है। (2 कुरिन्थियों 4:4)
4 ) वह भाईयों पर दोष लगाता है। ( प्रका. 12:10)
5) मसीहियों का परीक्षा लेना। ( लूका 22:31,32)
6) मनुष्य (जीवन) को नष्ट करता है। ( 1कुरिन्थियों 5:5)
*शैतान के कर्मचारी ( सहयोगी)*:-
1) दुष्टात्मा, अशुद्धात्मा, शैतान के दूत, दुष्टशक्तियां। ( 2 पतरस 2:4 )
2) प्रधानाधिकारी ,संसार के हाकिम और दुष्टता की आत्मिक सेनाएँ।( इफिसियों 6:12)
3) पापी भी जो उसकी इच्छाएँ को पूरी करते हैं । ( यूहन्ना 8:44)
4) कभी-कभी पास्टर या संत व्यक्ति भी अन्जाने में शैतान को अपना प्रयोग करने के लिए अनुमति देते हैं। ( मत्ती 16: 22,23)
*शैतान का परिणाम*:-
1) भविष्य में किसी दिन उसको स्वर्ग से निकाल दिया जाएगा। (प्रकाशितवाक्य 12:7,8)
2) तब शैतान लोगों को परमेश्वर के विरुद्ध भड़काएगा। ( प्रकाशितवाक्य 12:12)
3) फिर उसको एक स्वर्ग दूत जंजीर से बांध देगा। ( प्रकाशितवाक्य 20:12)
4) शैतान को हजार वर्ष के लिए अथाह कुंड में डाल दिया जायेगा। ( प्रकाशितवाक्य 20:3)
5) इसके बाद उसको कुछ समय के लिए छोड़ दिया जाएगा। तब वह लोगों को भरमाएगा और परमेश्वर के विरूद्ध विद्रोह करने का प्रयास करेगा। ( प्रकाशितवाक्य 20:7,8 )
6) शैतान पराजित हो जाता है,तब उसे अनन्त काल के लिए आग की झील में डाल दिया जायेगा। ( प्रकाशितवाक्य 20:7-10)
*मसीह जीवन हमारे महाशत्रु शैतान के विरुद्ध एक युद्ध है। मनुष्य के पतन के कारण हम शैतान की सम्पत्ति बन गए।और उसके दास बन गए।*
*बाइबल हमें शैतान का प्रतिरोध करने ,उससे लड़ने और अपने जीवन में उसे स्थान ना देने के लिए कहती है।*
*शैतान का व्यक्तित्व* :-
यूहन्ना 8:44 -
१. शैतान लालची है।
२. शैतान हत्यारा है।
३. शैतान झूठ का पिता है।
४. शैतान सत्य पर स्थिर नहीं रहता है।
५. शैतान में सत्य नहीं है।
६. शैतान झूठ बोलता है।
अय्युब 1:6-12
मत्ती 4: 1-11-
१.शैतान धूर्त है।
२. शैतान धोखेबाज है।
३. शैतान चालाकी है।
*शैतान का चरित्र* :-
1) शैतान चोर है। (मत्ती 13:19)
2) शैतान धूर्त है। ( 2कुरिन्थियों 11:3)
3) वह हत्यारा है। ( यूहन्ना 8:44)
4) वह झूठा है।( यूहन्ना 8:44)
5) वह धोखेबाज है। (प्रकाशितवाक्य 12:9)
*शैतान का अधिकार*: -
1) वह आकाश का अधिकारी है। (2 कुरिन्थियों 11:13-15)
2) वह गरजता हुआ सिंह के समान है। ( 1पतरस 5:8)
3) वह आकाश के अधिकारों का हाकिम है। ( इफिसियों 2:2)
4) वह अन्धकार की शक्ति है। (कुलुस्सियों 1:13)
5) वह बड़ा अजगर है। ( प्रकाशितवाक्य 12:9)
6) वह संसार का राजकुमार है। ( यूहन्ना 14:30)
7) वह नरक या अथाहकुंड का राजा है। ( प्रकाशितवाक्य 9:11)
*शैतान के कार्य*:-
1) वह ऐसों की खोज में रहता है ,जिसको वह फाड़ खाए। ( 1पतरस 5:8)
2) जंगली बीज और दुष्ट सिद्धांतों का बोने वाला है। ( मत्ती 13: 25:30)
3) मनुष्य की बुद्धि को अंधा कर देता है। (2 कुरिन्थियों 4:4)
4 ) वह भाईयों पर दोष लगाता है। ( प्रका. 12:10)
5) मसीहियों का परीक्षा लेना। ( लूका 22:31,32)
6) मनुष्य (जीवन) को नष्ट करता है। ( 1कुरिन्थियों 5:5)
*शैतान के कर्मचारी ( सहयोगी)*:-
1) दुष्टात्मा, अशुद्धात्मा, शैतान के दूत, दुष्टशक्तियां। ( 2 पतरस 2:4 )
2) प्रधानाधिकारी ,संसार के हाकिम और दुष्टता की आत्मिक सेनाएँ।( इफिसियों 6:12)
3) पापी भी जो उसकी इच्छाएँ को पूरी करते हैं । ( यूहन्ना 8:44)
4) कभी-कभी पास्टर या संत व्यक्ति भी अन्जाने में शैतान को अपना प्रयोग करने के लिए अनुमति देते हैं। ( मत्ती 16: 22,23)
*शैतान का परिणाम*:-
1) भविष्य में किसी दिन उसको स्वर्ग से निकाल दिया जाएगा। (प्रकाशितवाक्य 12:7,8)
2) तब शैतान लोगों को परमेश्वर के विरुद्ध भड़काएगा। ( प्रकाशितवाक्य 12:12)
3) फिर उसको एक स्वर्ग दूत जंजीर से बांध देगा। ( प्रकाशितवाक्य 20:12)
4) शैतान को हजार वर्ष के लिए अथाह कुंड में डाल दिया जायेगा। ( प्रकाशितवाक्य 20:3)
5) इसके बाद उसको कुछ समय के लिए छोड़ दिया जाएगा। तब वह लोगों को भरमाएगा और परमेश्वर के विरूद्ध विद्रोह करने का प्रयास करेगा। ( प्रकाशितवाक्य 20:7,8 )
6) शैतान पराजित हो जाता है,तब उसे अनन्त काल के लिए आग की झील में डाल दिया जायेगा। ( प्रकाशितवाक्य 20:7-10)
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